पुलिस वालों की शान में कुछ शब्द,जो ये सोचते हैं कि पुलिस बेवजह परेशान करती हैं, पुलिस के कुछ चेहरे ऐसे भी है जो ऐसे लोगो की जिंदगी बचाने में रक्तदान द्वारा सहयोग दे रहे हैं, जिन्हें वो जानते भी नही है।
खाकी वर्दी वालो, अगर कोई तुम पर गाडी चढ़ाने की
कोशिश करे, तलवार सिर पर, हाथो पर या टांगो पर मार दे चुप करके थाने आ जाना........., और पुरे हिंदुस्तान में सिर्फ एक पुलिस विभाग की बईमान है......... नेता, डॉक्टर, जज, वकील, बाकी बचे देश के लोग और दूसरे सरकारी विभाग में सब ईमानदार है........, सिर्फ पुलिस झूठ बोलती है बाकी सारा देश "सच" बोलता है...... पुलिस वालो, तुम इंसान थोड़ी हो...... गर्मी में तपकर, सर्दी में ठण्ड में जमकर..... सारी सारी रात उठकर.... लोगो को उनकी नींद पूरी करने देते हो..... "तुम इंसान थोड़ी हो..........बाटला हाउस में इंसपेक्टर मोहन चंद शर्मा बिना बुलेट प्रूफ वेस्ट के चले गए...., ACP राजबीर देश से आंतकी खत्म करने में लगा था...... युमनापार का SI राजकुमार, शराब बेचने वालो पर कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा था........ 13 दिल्ली पुलिस वाले ट्रैफिक कण्ट्रोल करवाते करवाते अपनी जान गवां बैठे........., ना जाने कितने अपनी नौकरी के प्रेशर की वजह से आत्महत्या कर लेते है......... 'वो इंसान थोड़ी थे"....... इन पुलिस वालो का परिवार नहीं होता......., यह होमलेस होते है......, इनके बच्चे बच्चे नहीं होते......., कभी जनता जलील करती है...... कभी बड़े अफसर ज़लील करते है....... कभी नेता ज़लील करते है........ "यह पुलिस वाले इंसान नहीं होते" ........ "कोई तुम्हे बेशक जान से मार दो यह अपना बचाव नहीं करना..... किया तो DCPअपनी कुर्सी बचाने के लिए 5 मिनट में सस्पेंशन आर्डर टाइप करवा देंगे........, "यह पुलिस वाले इंसान थोड़ी होते है....... मुझे तो ऐसा लगता है पुलिस विभाग होना ही नहीं चाहिए...... "आजकल लोग अपनी हिफाजत कर ही लेते है........ लॉ एंड आर्डर का वजूद कुछ इस तरह बन गया है......., जब मर्ज़ी कपडे उतार दो..... "पुलिस वालो को तो हवा में सांस भी नहीं लेनी चाहिए......, "वो इंसान थोड़ी है"....... सारा देश ईमानदार है...... और सिर्फ पुलिस वाले रिश्वत ही की बात करते है......., योगराज की गर्दन कटती, तो क्या होता...... केजरीवाल उसके घर भी चला जाता...... यह "पुलिस वाले होते क्यों है ?.... इनकी क्या ज़रूरत है ?........ सच तो यह है की जब अच्छे अच्छो की फट जाती है........ तो सिलवाई करवाने पुलिस के पास जाते है...... कानून की दुहाई देते है....... और अपनी जान की सुरक्षा मांगने जाते है...... और जिससे अपनी जान की सुरक्षा मांगते है.... उनको ही जलील करने में कोई कमी नहीं छोड़ते ..... लानत है ऐसी डेमोक्रेसी पर.....
नई सोच नया कदम
Gunjan kumar 9546437268
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